कर्नाटक बंद: 22 मार्च को कर्नाटक में KSRTC बस कंडक्टर पर हमले के विरोध में 12 घंटे का बंद रहेगा. बंद के कारण विभिन्न सार्वजनिक सेवाएं बाधित होने की संभावना है.
कर्नाटक में 22 मार्च को कन्नड़ समर्थक समूहों ने बेलगावी में केएसआरटीसी बस कंडक्टर पर कथित हमले के विरोध में 12 घंटे के राज्यव्यापी बंद की घोषणा की है. इस बंद ऐलान से स्कूलों, कॉलेजों, बैंकों, सार्वजनिक परिवहन और अन्य उपयोगिता सेवाओं के कामकाज पर असर पड़ सकता है.
कर्नाटक में 22 मार्च को बैंक बंद रहेंगे?
कर्नाटक बंद के कारण 22 मार्च को बैंक खुले रहेंगे या बंद रहेंगे, इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं की गई है. हालाँकि, बैंक आमतौर पर हर महीने के चौथे शनिवार को बंद रहते हैं जबकि 22 मार्च को चौथा शनिवार है, इसलिए पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे. इसके अलावा RBI ने बिहार दिवस के कारण 22 मार्च को पटना में बैंक अवकाश भी घोषित किया है.
बैंक कब बंद रहते हैं?
भारतीय रिज़र्व बैंक RBI किसी भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय त्यौहार के अवसर पर बैंक अवकाश निर्धारित करता है.त्यौहारों के अलावा, बैंक आमतौर पर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को खुले रहते हैं जबकिदूसरे और चौथे शनिवार को बैंक में अवकाश रहता है .
मार्च में बैंक अवकाश
मार्च में बैंक सप्ताहांत को छोड़कर आठ दिनों तक बंद रहेंगे. RBI के बैंक अवकाश कैलेंडर के अनुसार, 7, 13, 14, 15, 22, 27, 28 और 31 मार्च को बैंक बंद रहेंग. और यह अवकाश चपचर कुट, होलिका दहन/अट्टुकल पोंगाला, होली, याओसांग, बिहार दिवस, शब-ए-कद्र, जुमा-उल-विदा और रमज़ान-ईद (ईद-उल-फ़ित्र) जैसे त्यौहारों के कारण बैंक आठ दिनों तक बंद रहेंगे.
कर्नाटक बंद का समय
कर्नाटक शनिवार, 22 मार्च को सुबह 6 बजे से शुरू होकर शाम 6 बजे तक 12 घंटे का बंद ऐलान रहेगा.
क्या 22 मार्च को बेंगलुरु बंद रहेगा?
कर्नाटक बंद ऐलान के कारण शनिवार, 22 मार्च को बेंगलुरु में कुछ सार्वजनिक सेवाएं 12 घंटे के लिए बंद रहेंगी.
कर्नाटक बंद का कारण क्या है?
कर्नाटक बंद का ऐलान इसलिए किया गया है की 22 फरवरी को बेलगावी में केएसआरटीसी के एक बस कंडक्टर पर मराठी समर्थक समूहों द्वारा मराठी में बात न करने पर कथित रूप से हमला किया गया था, जिससे क्षेत्र में भाषाई तनाव बढ़ गया था.और इसकी वजह से 22 मार्च को कन्नड़ समर्थक समूहों इस हमले के विरोध में 12 घंटे के राज्यव्यापी बंद की घोषणा की है.
महाराष्ट्र-कर्नाटक भाषा मुद्दा
कर्नाटक में मराठी को लेकर भाषाई तनाव, महाराष्ट्र के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद से उपजा है, विशेष रूप से उत्तरी बेलगावी क्षेत्र में, जहां मराठी भाषी आबादी काफी ज्यादा है.
1 मई, 1960 को महाराष्ट्र के गठन के बाद, राज्य ने बेलगांव (अब बेलगावी), कारवार और निप्पनी सहित 865 गांवों पर अपना दावा पेश किया. महाराष्ट्र इन गांवों को अपने अधिकार क्षेत्र में चाहता है, जबकि कर्नाटक ने इन क्षेत्रों को छोड़ने से इनकार कर दिया है.