फ़कीर मोहम्मद खान ने कथित तौर पर श्रीनगर के तुलसी बाग़ सरकारी क्वार्टर में आत्महत्या कर ली है. भाजपा पदाधिकारियों ने कहा कि खान ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से आत्महत्या की.
भारतीय जनता पार्टी यानि की भाजपा के वरिष्ठ नेता और गुरेज से पूर्व विधायक फकीर मोहम्मद खान ने कथित तौर पर श्रीनगर के तुलसी बाग सरकारी आवास में आत्महत्या कर ली. भाजपा पदाधिकारियों ने बताया कि खान ने कथित तौर पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली.
उन्होंने बताया कि 62 वर्षीय खान ने श्रीनगर के तुलसीबाग सरकारी क्वार्टर में खुद को गोली मार ली. और उसके बाद उन्हें तुरंत श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल ले जाया गया, जहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उनकी मौत की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है.
भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि पूर्व विधायक ने आत्महत्या की है .
अभी तक यह पता नहीं चल पाया की फकीर मोहम्मद खान ने यह आत्मघाती कदम क्यों उठाया.
मायनेता इन्फो के अनुसार , फ़कीर मोहम्मद खान राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर थे. उन्होंने इसी विषय में बी.एड. की डिग्री भी पूरी की थी. वेबसाइट पर पूर्व विधायक को शिक्षक भी बताया गया है.
सीएम उमर अब्दुल्ला, भाजपा ने श्रद्धांजलि दी
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने फकीर मोहम्मद खान के निधन पर अपनी संवेदना व्यक्त की. जम्मू-कश्मीर के सीएम ने खान को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें “सच्चा जमीनी नेता” बताया.
सीएम अब्दुल्ला ने कहा, “पूर्व विधायक फकीर मोहम्मद खान के निधन से बहुत दुख हुआ. वह एक सच्चे जमीनी नेता थे. उनके परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना. उनकी आत्मा को शांति मिले. इसके अलावा सदन ने उनके सम्मान में दो मिनट का मौन रखा.”
जम्मू और कश्मीर विधानसभा ने फकीर मोहम्मद खान के निधन पर शोक व्यक्त किया और सम्मान स्वरूप दो मिनट का मौन रखा.
फ़कीर मोहम्मद खान 1,049 वोटों से हारे
62 वर्षीय राजनेता फकीर मोहम्मद खान पहली बार 1996 में एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में जम्मू और कश्मीर विधानसभा के लिए चुने गए थे. वह 2020 में भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा उम्मीदवार के रूप में 2024 के जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव में असफल रहे.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नजीर अहमद खान ने उन्हें 1,049 मतों के अंतर से हराया.
भाजपा में शामिल होने से पहले फ़कीर मोहम्मद खान पीडीपी में शामिल हुए थे और 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पार्टी से इस्तीफा देने से पहले इसके क्षेत्रीय अध्यक्ष थे.