वित्त वर्ष 2025 में भारतीय शेयर बाजार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसका असर प्रमुख कंपनियों पर पड़ा. केवल आदित्य बिड़ला समूह के बाजार पूंजीकरण में वृद्धि देखी गई, जबकि अडानी, रिलायंस और टाटा जैसे अन्य शेयरों में गिरावट देखी गई, जो शेयर मूल्य में गिरावट और व्यापार युद्ध और निवेशकों की बिकवाली जैसे बाहरी दबावों के कारण हुई.
भारतीय शेयर बाजार: यह वित्तीय वर्ष न केवल भारतीय शेयर बाजार के लिए बल्कि देश के सबसे बड़े समूह के लिए भी चुनौतीपूर्ण रहा. विदेशी निवेशकों की बिकवाली, व्यापार युद्ध की आशंका और मूल्यांकन संबंधी चिंताओं जैसे प्रतिकूल हालातों से बाजार जूझ रहा था, वहीं मुकेश अंबानी, गौतम अडानी , कुमार मंगलम बिड़ला और टाटा समूह की कंपनियां भी इस उथल-पुथल से अछूती नहीं रहीं.
बाजार की रिपोर्टों से पता चलता है कि इन चार प्रमुख भारतीय समूहों में से केवल एक – आदित्य बिड़ला समूह – की कंपनियों के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में वृद्धि देखी गई है.
आदित्य बिड़ला समूहजीत की ओर
कैपिटललाइन के आंकड़ों के मुताबिक, आदित्य बिड़ला समूह की 40 कंपनियों में से 26 के शेयर की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई, जबकि इस कंपनी में 14 शेयरों का नुकसान हुआ. इससे वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में कुल मार्केट कैप में ₹ 1,45,495 करोड़ की बढ़त हुई.
समूह की प्रमुख कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में 18% की तेजी आई और बाजार पूंजीकरण में सर्वाधिक 57,680 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई.
यूबीएस ने हाल ही में इस शेयर को अपग्रेड करके ‘खरीदें’ कर दिया है और लक्ष्य मूल्य को ₹ 9,000 से बढ़ाकर ₹ 13,000 कर दिया है , क्योंकि संरचनात्मक लागत बचत, मूल्य स्थिरीकरण और अल्ट्राटेक और अंबुजा सीमेंट द्वारा संचालित समेकन के बीच यह क्षेत्र पर सकारात्मक बना हुआ है.
आदित्य बिड़ला समूह में चंबल फर्टिलाइजर्स, आदित्य बिड़ला फैशन, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और ग्रासिम ने बाजार पूंजीकरण में प्रमुख योगदान दिया. जब की दूसरी ओर, केसोराम इंडस्ट्रीज और बिड़ला कॉरपोरेशन सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे.
अडानी, अंबानी और टाटा के लिए कठिन वर्ष
इस बीच, वित्त वर्ष 2025 में भारत के पहले उधोगपति मुकेश अंबानी, गौतम अडानी और टाटा के लिए कठिन वर्ष साबित हुआ क्योंकि इन समूहों के बाजार पूंजीकरण में गिरावट दर्ज हुई है .
अडानी समूह बाजार
गौतम अडानी हस्त अडानी समूह में, किसी भी कंपनी के शेयर की कीमत में कोई वृद्धि नहीं देखी गई, अडानी ग्रीन के शेयर की कीमत वित्त वर्ष 25 में 48% कम हुई, जिससे अकेले ही बाजार पूंजीकरण में ₹ 1,40,171 करोड़ का नुकसान हुआ. अडानी समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज ने भी हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में ₹ 96,093 करोड़ की भारी संपत्ति का क्षरण देखा.
इस अवधि के दौरान, अडानी समूह के शेयरों में 5-48% तक की गिरावट दर्ज हुई, जिसकी वजह से कंपनी के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश पड़ा, जिसमें रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोप भी शामिल थे, जिसके कारण इसकी व्यावसायिक प्रथाओं की जांच हुई और घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसकी परियोजनाओं और साझेदारियों पर संभावित प्रभाव पड़ा.
अंबानी समूह का बाजार
भारत के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह के बाजार पूंजीकरण के बारे में देखे तो उसमे में कुल 3,78,758 करोड़ रुपये की गिरावट देखी गई, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) सबसे बड़ी संपत्ति नष्ट करने वाली कंपनी के रूप में उभरी.
वित्त वर्ष 2026 में आरआईएल के शेयर की कीमत में 14% की गिरावट दर्ज हुई, जिसके परिणामस्वरूप अंबानी समूह के बाजार पूंजीकरण को ₹ 2,88,633 करोड़ का नुकसान हुआ. रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कारोबार में कमजोरी और रिलायंस रिटेल में वृद्धि में कमी के कारण आय में गिरावट के बीच शेयर में बिकवाली देखी गई.
हालाँकि बाजार एक्सपर्ट का मानना है कि चौथी तिमाही के नतीजों के बाद रिलायंस के शेयर में नई तेजी देखने को मिल सकती है. उनका शेयर के बारे में दीर्घकालिक सकारात्मक नजरिया है क्योंकि उन्हें अगले साल खुदरा कारोबार में वैल्यू अनलॉकिंग की उम्मीद है.
हाल ही में अंबानी समूह से अलग होकर सूचीबद्ध हुई जियो फाइनेंशियल के शेयर में 35.73% की गिरावट के बीच वित्त वर्ष 26 में इसके बाजार पूंजीकरण में 80,306 करोड़ रुपये की गिरावट देखी गई.
हालाँक , दूसरी ओर, टीवी18 ब्रॉडकास्ट और जस्ट डायल रिलायंस समूह में सबसे अधिक लाभ कमाने वाले शेयरों के रूप में उभरे.
टाटा समूह का बाजार
टाटा समूह की 25 कंपनियों में से नौ के बाजार पूंजीकरण में बढ़ोतरी हुई, जबकि 16 के बाजार पूंजीकरण में गिरावट देखि गई. इस प्रकार टाटा समूह के कुल बाजार पूंजीकरण में 2,58,770 करोड़ रुपये की गिरावट आई.
टाटा मोटर्स और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बाजार पूंजीकरण में ₹ 1 लाख करोड़ से ज्यादा की गिरावट आई, जिसकी वजह से टाटा मोटर्स कंपनी में ₹ 1,15,365 करोड़ और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कंपनी को ₹ 1,00,981 करोड़ का नुकसान हुआ. बिक्री में मंदी और डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ऑटो आयात पर 25% टैरिफ लगाए जाने की हालिया चिंताओं के कारण टाटा मोटर्स के शेयरों 32% की गिरावट दर्ज हुई. इस बीच, अमेरिका में विवेकाधीन खर्च में गिरावट और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंकाओं के कारण आईटी प्रमुख टीसीएस को इस अवधि में 19% का नुकसान हुआ है.
हालाँकि, ट्रेंट टाटा समूह के लिए सबसे बड़ा बाजार पूंजीकरण योगदानकर्ता बनकर उभरा है, जिसके बाद इंडियन होटल्स और वोल्टास का स्थान है.