RSS नेता सुरेश जोशी ने औरंगजेब मकबरे विवाद को ‘अनावश्यक’ बताया और कहा ‘जिनकी आस्था है वे जाएंगे’

Hetal Chudasma

RSS  नेता सुरेश जोशी ने औरंगजेब की कब्र को लेकर विवाद को खारिज करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह भारत की समावेशी सोच को दर्शाता है. यह टिप्पणी सांप्रदायिक तनाव के बीच आई है, जो इसे हटाने की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों से पैदा हुई है.  यह टिप्पणी समकालीन समाज में ऐतिहासिक आख्यानों की जटिलताओं को उजागर करती है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी ने  31 मार्च सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र का मुद्दा अनावश्यक रूप से उठाया गया है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानि की RSS  के नेता ने कहा कि मुगल बादशाह औरंगजेब का मकबरा महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में है, क्योंकि उनकी मृत्यु यहीं हुई थी और जो भी व्यक्ति आस्थावान होगा, वह इस ढांचे को देखने जाएगा.

इस मार्च महीने की शुरुआत में मध्य नागपुर में हिंसा भड़क उठी थी, जिसके चलते पुलिस पर पथराव किया गया था. यह अफवाह फैली थी कि महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में 17वीं सदी के मुगल बादशाह औरंगजेब के मकबरे को हटाने की मांग को लेकर एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए आंदोलन के दौरान एक समुदाय के पवित्र ग्रंथ को जला दिया गया था.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानि मनसे के प्रमुख राज ठाकरे ने 30 मार्च रविवार को औरंगजेब की कब्र को लेकर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयासों की निंदा की और कहा कि इतिहास को जाति और धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. इसके अलावा उन्होंने लोगों से ऐतिहासिक जानकारी के लिए व्हाट्सएप फॉरवर्ड पर भरोसा न करने को भी कहा.

मनसे के प्रमुख राज ठाकरे ने यह भी कहा कि मुगल शासक “शिवाजी नामक विचार को मारना चाहते थे” लेकिन वे असफल रहे और महाराष्ट्र में उनकी मृत्यु हो गई. मनसे प्रमुख ने कहा कि बीजापुर के सेनापति अफजल खान को प्रतापगढ़ किले के पास दफनाया गया था और छत्रपति शिवाजी महाराज की अनुमति के बिना ऐसा नहीं किया जा सकता था.

इस महीने की शुरुआत में नागपुर में मजार को हटाने की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान पवित्र शिलालेखों वाली एक “चादर” को जलाए जाने की अफवाहों के कारण हिंसा भड़क उठी थी.

राज ठाकरे की टिप्पणियों और मुगल बादशाह की कब्र के मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर सुरेश जोशी ने कहा, “औरंगजेब की कब्र का मुद्दा बेवजह उठाया गया है. उनकी मृत्यु यहीं भारत में हुई थी, इसलिए उनकी कब्र यहीं बनाई गई है. जिनकी आस्था है, वे जाएंगे.”

पूर्व RSS महासचिव ने कहा, “हमारे पास छत्रपति शिवाजी महाराज का आदर्श (रोल मॉडल) है, उन्होंने अफजल खान की कब्र बनवाई थी. यह भारत की उदारता और समावेशिता का प्रतीक है. कब्र बनी रहेगी, जो भी जाना चाहेगा, जाएगा.”

इस महीने की शुरुआत में आरएसएस के मुख्य प्रवक्ता सुनील अम्बेकर ने 17वीं सदी के मुगल सम्राट औरंगजेब को “अप्रासंगिक” बताया था.

संगठन की तीन दिवसीय राष्ट्रीय बैठक से पहले कर्नाटक के बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान अम्बेकर ने कहा, “किसी भी प्रकार की हिंसा समाज के स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है और मुझे लगता है कि पुलिस ने इसका संज्ञान लिया है और इसलिए वे इसकी विस्तृत जांच करेंगे.”

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